यह पत्रिका हिन्दी चिट्ठों (blogs) पर प्रकाशित प्रविष्टियों में से चयनित उत्कृष्ट रचनाओं का एक गुलदस्ता है। यह हिन्दी के उन ऑनलाइन पाठकों के लिए, जो अब तक चिट्ठाकारी से अपरिचित रहे हैं, हिन्दी चिट्ठा जगत के निराले और रंग-बिरंगे संसार में झाँकने का एक झरोखा है।

विगत चार वर्षों के दौरान हिन्दी चिट्ठाकारी ने आशातीत उन्नति की है। दुनिया के भिन्न-भिन्न स्थानों से अलग-अलग पेशों, विशेषज्ञताओं और अभिरुचियों से जुड़े चिट्ठाकारों द्वारा तकरीबन आठ सौ चिट्ठे हिन्दी में लिखे जा रहे हैं। विषयों की विविधता, रचनाओं की गुणवत्ता, भाषा की सहजता और लेखन-शैली की पठनीयता के लिहाज से इन चिट्ठों पर हो रहे लेखन के स्तर को उत्कृष्ट मानी जाने वाली पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित सामग्री से उन्नीस नहीं कहा जा सकता।

हिन्दी चिट्ठा जगत (Hindi blogdom) में बहुत-से पेशेवर पत्रकार, सिद्ध लेखक सक्रिय हैं और अन्य क्षेत्रों में पेशेवर दक्षता रखने वाले कई चिट्ठाकारों की लेखन-प्रतिभा भी अत्यंत उत्कृष्ट स्तर की है। यदि भिन्न-भिन्न हिन्दी चिट्ठों में से प्रासंगिकता, उत्कृष्टता और पठनीयता के आधार पर अपेक्षाकृत बेहतर रचनाओं का हर सप्ताह चयन करके उनको संपादित और सुसज्जित करते हुए एक सुन्दर गुलदस्ते के रूप में प्रस्तुत किया जाए तो वह हम हिन्दी चिट्ठाकारों की तरफ से हिन्दी के ऑनलाइन पाठकों को एक बेहतरीन भेंट होगी।

चिट्ठाकारी की शुरुआत आम तौर पर शौक और कौतूहल के भाव से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह शगल बन जाता है और आगे चलकर कई चिट्ठाकार इसे अपनी दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक अंग बना लेते हैं। जिस कार्य में इतने समय, श्रम और संसाधन का नियोजन किया जाता हो, उसके प्रति यदि थोड़ी-सी पेशेवर गंभीरता अपनाई जाए तो चिट्ठाकारी की विधा अधिक सुनियोजित तरीके से विकसित हो सकती है और इस कार्य से जुड़े साथियों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतिदान भी मिल सकता है।

इसी इरादे और शुभकामना के साथ इस पत्रिका का शुभारंभ किए जाने का निश्चय किया गया है। इस पत्रिका को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए आपके सुझावों के साथ-साथ आपका सक्रिय सहयोग भी प्रार्थनीय है।

हिन्दी चिट्ठों पर प्रकाशित होने वाली रचनाओं को हमने सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया है - समसामयिक और वैचारिक;  कमाई और कारोबार;  कविता और साहित्य; विज्ञान और तकनीक;  हास्य-व्यंग्य और मनोरंजन; घमासान; और विविध। इन सात श्रेणियों में हिन्दी चिट्ठाकारी की सतरंगी इंद्रधनुषी छटा प्रतिबिंबित होगी। इन्हें संगीत के सरगम के सात स्वरों की अनुगूंज के रूप में या योग साधना के सात चक्रों के आलोक के प्रतिरूपण की भाँति भी सुना-देखा जा सकता है।

इसके अलावा, संपादकीय, चिट्ठों की समीक्षा, चिट्ठाकारों के साथ अंतरंग बातचीत, प्रासंगिक विषयों पर सर्वेक्षण, वैकल्पिक मीडिया से जुड़े विशेष आलेख और पाठकनामा जैसे स्तंभ भी इसमें शामिल रहेंगे।

जिस प्रकार किसी माली की सौंदर्य-दृष्टि और बागवानी की कलात्मक कुशलता का तत्व जुड़ जाने पर पेड़-पौधों और बाग-बगीचों की खूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं, उसी तरह यह भी एक विनम्र कोशिश है हिन्दी चिट्ठाकारी के निराले और सुन्दर संसार की इंद्रधनुषी छटा को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करने की। आप सबके सुझाव और सहयोग सादर आमंत्रित हैं।