- लेखक - कमल शर्मा
भारतीय शेयर बाजार बीएसई सेंसेक्स के नई ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अधिकतर निवेशकों का कहना था कि जल्दी बताओ, कौन-कौन सी कंपनियों के शेयर खरीदें…हम तो गाड़ी चूक गए। शेयर बाजार की गाड़ी नहीं पकड़ पाने के लिए अफसोस जाहिर करते और अगली गाड़ी पकड़ने के लिए अधीर निवेशकों को हम राय देना चाहेंगे कि शेयर बाजार में आपाधापी का खेल न खेलें। अब तक जो भी निवेशक शेयर बाजार को कोसते हुए मिलते हैं या जिन्होंने इस बाजार में अपने हाथ जलाएं हैं वे इस आपाधापी में थे कि मैं भी दूसरों की तरह क्यों नहीं पैसा कमा सका। दूसरे की कमीज मेरी कमीज से ज्यादा सफेद क्यों।
इस समय शेयर बाजार में अलग अलग विश्लेषक अलग-अलग बात कह रहे हैं। लेकिन मेरे ख्याल से इस साल के आखिर या अगले साल की शुरूआत में बीएसई सेंसेक्स 20 हजार अंक तक पहुंच जाएगा। इस महीने शेयर बाजार में अगस्त महीने जैसा करेक्शन दिखाई दे सकता है। बाजार का मजबूत प्रतिरोध 16500-16700 पर दिखता है।…टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में यह चर्चा जोरों पर है कि सेंसेक्स का अगला मुकाम क्या होगा?
सेंसेक्स का मुकाम कुछ भी हो लेकिन हम सभी निवेशकों से कहना चाहेंगे कि किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके बारे में सारी जानकारी जुटा लें क्योंकि इस समय बाजार में अफवाहों का दौर है कि यह लो…यह पकड़ो…यहां बिल्कुल मत चूको…भागो….पकड़ो…। एक निवेशक होने के नाते सारी सूचनाएं आपके पास होनी चाहिए। लेकिन जिस कंपनी के शेयर लेना चाहते हैं उन्हें आप अपने पास कितने समय रखेंगे यानी कितने समय के कारोबार के हिसाब से खरीदना चाहते हैं…इंट्रा डे…शार्ट टर्म….लांग टर्म…। किसी भी सुनी-सुनाई टिप के आधार पर शेयर नहीं खरीदें…क्योंकि ऐसा न हो कि शेयर बाजार का कचरा आपके हाथ में आ जाए और आपके सपनों पर पानी फिर जाए। बेहतर कंपनियों और तेजी से बढ़ते उद्योगों के ही शेयर खरीदे लेकिन छोटी-छोटी मात्रा में। सारा खरीद ऑर्डर एक साथ न दें।
हमेशा यह ध्यान रखें कि बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा और कंपनियां तो बनती-बिगड़ती रहती है। यदि आप रिलायंस चूक गए तो कोई बात नहीं…क्योंकि रिलायंस को आज तक सफर तय करने में कई साल लगे हैं। ठीक ऐसी ही दूसरी कंपनी की तलाश कीजिए और देखिए कि वह भी इतने साल बाद रिलायंस बनती है या नहीं। एल एंड टी छूट गई तो क्या्…पकड़िए किसी दूसरी इंजीनियरिंग कंपनी को जो बरसों बाद दूसरी एल एंड टी होगी। असली निवेशक वही है जो भारत की भावी बड़ी कंपनियों में आज कम निवेश करता है और हो जाता है करोड़पति कुछ साल बाद। वर्ष 1980 में विप्रो के सौ रुपए वाले सौ शेयर को आपने खरीदा होता तो आज आपके पास दो सौ करोड़ रुपए हो सकते थे। वर्ष 1992 में इंफोसिस के शेयर में दस हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज डेढ़ करोड़ रुपए हो सकते थे। इसी तरह 1980 में रेनबेक्सी में एक हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज तकरीबन दो करोड़ रूपए होते। पुरानी बातें छोड़ भी दें तो अगर आपने 2004 की गिरावट के दौरान यूनिटेक में 40 हजार रुपए का निवेश किया होता तो आज आपके पास एक करोड़ दस लाख रुपए हो सकते थे। इंतजार करने वाले निवेशकों को ही यहां फायदा होता है, भले ही सेंसेक्स कुछ भी हो। जिस तरह एक बच्चे को पूरी तरह क्षमतावान होने में समय लगता है वही इन कंपनियों के साथ होता है। इसलिए उन होनहार कंपनियों की तलाश कीजिए जो कल जवान होकर बाजार के शिखर पर होंगे।
साभार : वाह ! मनी
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