कवयित्री: घुघूती बासूती

क्षमा करना माँ
मैंने भी तुम्हारी इच्छाओं,
अपेक्षाओं को नज़र अन्दाज कर दिया माँ
क्षमा करना माँ,
मैं तुम जैसी न बन सकी,
प्रश्न करती रही
औरों से नहीं तो स्वयं से तो करती रही माँ,
मैं त्याग तो करती रही
किन्तु इन प्रश्नों ने मुझे
त्यागमयी न बनने दिया,
मैं ममता तो लुटाती रही
किन्तु ममतामयी न हो सकी।

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