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	<title>पत्रिका</title>
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	<description>हिन्दी चिट्ठों की इंद्रधनुषी छटा</description>
	<lastBuildDate>Wed, 31 Oct 2007 08:56:09 +0000</lastBuildDate>
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	<language>en</language>
	
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		<title>युद्ध की भाषा का सौंदर्य</title>
		<description>
&#160;


	लेखक - अनूप शुक्ल

युद्ध की समाप्ति युद्ध के द्वारा ही होती है - माओ।
&#160;
आजकल हम पूना के तकनीकी प्रशिक्षण कालेज में हैं। तमाम युद्ध से जुड़े हथियार और तकनीक की जानकारी हासिल कर रहे हैं।
&#160;
जब भी युद्ध की बात होती है, इसके बारे में एक भयावह तस्वीर सामने आती है। ...</description>
		<link>http://patrika.srijanshilpi.com/archives/8</link>
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		<title>शेयर बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा</title>
		<description>

	लेखक - कमल शर्मा

भारतीय शेयर बाजार बीएसई सेंसेक्स के नई ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अधिकतर निवेशकों का कहना था कि जल्दी बताओ, कौन-कौन सी कंपनियों के शेयर खरीदें...हम तो गाड़ी चूक गए। शेयर बाजार की गाड़ी नहीं पकड़ पाने के लिए अफसोस जाहिर करते और अगली गाड़ी पकड़ने के ...</description>
		<link>http://patrika.srijanshilpi.com/archives/7</link>
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		<title>क्षमा करना माँ</title>
		<description>

	कवयित्री: घुघूती बासूती

क्षमा करना माँ
मैंने भी तुम्हारी इच्छाओं,
अपेक्षाओं को नज़र अन्दाज कर दिया माँ
क्षमा करना माँ,
मैं तुम जैसी न बन सकी,
प्रश्न करती रही
औरों से नहीं तो स्वयं से तो करती रही माँ,
मैं त्याग तो करती रही
किन्तु इन प्रश्नों ने मुझे
त्यागमयी न बनने दिया,
मैं ममता तो लुटाती रही
किन्तु ममतामयी न हो ...</description>
		<link>http://patrika.srijanshilpi.com/archives/6</link>
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		<title>देवता बनाम मनुष्य : राम सेतु विवाद के बहाने</title>
		<description>

	लेखक - राजकिशोर

ईश्वर मनुष्य के लिए है या मनुष्य ईश्वर के लिए? यह सवाल ही बेहूदा है। क्योंकि ईश्वर मनुष्य-विरोधी नहीं हो सकता। वह नहीं चाहता तो हम पैदा ही नहीं होते। उसने हमें जन्म दिया है तो वह हमारे हितों की फिक्र भी करेगा। दूसरी तरफ, मनुष्य अगर ईश्वर ...</description>
		<link>http://patrika.srijanshilpi.com/archives/5</link>
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	<item>
		<title>अनामदास : जिनका अंदाजे बयां है और</title>
		<description>(लेखक - काकेश)

किसी लेखक के लेखन की समीक्षा करते समय लेखक के परिचय की आवश्यकता होती है, लेकिन अनामदास का परिचय कुछ अलग किस्म का है। अपने चिट्ठे पर पहले उन्होंने अपना परिचय देते हुए लिखा था "कीबोर्ड की खाता हूँ, उसके बिना मन नहीं लगता। हर काम आराम से ...</description>
		<link>http://patrika.srijanshilpi.com/archives/4</link>
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		<title>बेजी : पारदर्शी व्यक्तित्व और लेखन</title>
		<description>(घुघूती बासूती के साथ डॉ. बेजी की अंतरंग बातचीत)


बेजी के लेखन में संवेदनशीलता और बुद्धिमता का बेजोड़ समन्वय मिलता है। उनकी कविता जीवंत अनुभूतियों को हू-ब-हू शब्दबद्ध कर सकने की कला की अनोखी मिसाल है। उनका गद्य इतना पारदर्शी है कि उसमें लेखिका के चिदाकाश पर उमड़ते-घुमड़ते विचारों के बादलों ...</description>
		<link>http://patrika.srijanshilpi.com/archives/3</link>
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		<title>इंटरनेट, चिट्ठाकारी, पत्रकारिता और क़ानून</title>
		<description>(लेखक - सृजन शिल्पी) 

चिट्ठा जगत में पत्रकारिता बनाम चिट्ठाकारिता पर बहस अक्सर चलती ही रहती है। देबाशीष जी द्वारा एक बार चिट्ठा चर्चा पर इस बहस के पटाक्षेप की घोषणा कर दिए जाने के बाद भी वह जारी है। डॉ. बेजी ने इस बहस को लेकर पिछली बार कुछ ...</description>
		<link>http://patrika.srijanshilpi.com/archives/1</link>
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